Monday, October 28, 2013

जादू


तुम्हे कुछ लिखने के लिए पैन उठाया है
कागज भी पास ही पड़ा है मेरे
तुम्हारी जिंदगी जैसा सफेद
उसके नीचे कुछ रखना भी है
जो संभाल सके शब्दों को
शब्द जो तुम्हारी तरह ही सच्चे हैं
वो किताब दिखी
जिसे मैं तुम्हारे नाराज होने से पहले पढ़ रहा था
उसका नाम जादू है
ये वही किताब है जिसे मैं पढ़कर तुम्हे देना चाहता था
इस सीरिज की दोनों किताबें तुम पढ़ चुकी होगी शायद
किताबें जादू करती हैं, पर तुम से ज्यादा नहीं
किताबों में तो हर बार तुम्ही मिली हो मुझे
तुम वैसी ही इंसान हो
जैसा किताबों में लिखा है
कौन हो तुम, कहां से उतरी हो
कहां से सीखी तुमने इतनी इंसानियत
आओ, दुनिया को अपने जैसा बना दो...

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