Tuesday, November 12, 2013

चांद का इंतजार


मैं जानता हूं तुम अलग हो बहुत
मैं भी हूं शायद थोड़ा
तुम बात करते करते फोन काट देती हो
मैं इंतजार करता हूं घंटों
जब तुम बिजी होती हो
मैं तुम्हारे इंतजार में 'फ्री' हो जाता हूं
तुम चांद हो
मैं तुम्हारी रोशनी के पीछे भागता हूं
तुम बाद में बताती हो व्यस्त होने का कारण
मैं तुम्हारे लौट रहे जवाब को महसूस करता हूं
तुम्हारे बिजी होने का कारण होता है मजबूत
हर बार
सिर्फ बताती बाद में हो
खुद पर मुझे फिर अफसोस होता है घंटों...

Monday, November 4, 2013

ख्वाहिशों की बारिश



बादल गरजे
नींद खुल गई है मेरी
शायद बारिश होगी
मैं सपने में था
तुम्हारे साथ
या शायद तुम आई थी मुझसे मिलने
परेशान, उदास और मायूस
तुमने दूर से इशारा किया था सपने में
जल्दी आने को
या शायद कहा
वहीं रहो
क्यों आते हैं ऐसे सपने
क्या तुम ये कहने आई थी
कि मत याद आओ मुझे
या मेरी याद खींच लाई थी तुम्हे
बाहर बारिश तेज हो गई है
मन में तूफानों के बाद की आंधी बढ़ रही है
क्या था सपने का मतलब
मुझे पीछे छूटना होगा शायद
क्योंकि तुम्हे जिंदगी में बहुत आगे जाना है
मैं पच्चीस का होकर भी सोलह की तरह प्रेम करता हूं
उस दिन वाली बारिश याद है तुम्हे
मैं अकेला भीग रहा था
तुम खड़ी थी सबके साथ
खुद को बचाकर
बाद में तुमने कहा था
तुम भी भीगना चाहती थी
साथ-साथ
उस दिन सिर्फ तन भीगा था मेरा
मन तो तुम्हारे पीले दुपट्टे में उलझा था
आज जब तुम नाराज हो
सपने में भी कुछ नहीं बोली
बाहर बारिश और तेज हो गई है
जागने पर सबसे पहले मैंने फोन देखा
नहीं भेजा था तुमने कोई 'टैक्स्ट'
मैं जानता हूं
तुम्हे सपने नहीं आते
तुम तो दिन में जीती हो उनमें
मैं बहुत थकने के बाद सोता हूं
फिर भी बेचैन करने आ जाते हैं
बारिश और तेज हो गई है
बिजली की कुछ तारें टकरा रही हैं
एक सेकेंड की रोशनी में भी तुम्हारा चेहरा दिखता है
दिल बैठने लगा है
बारिश कम हो गई है
जाओ, चली जाओ
मैं नहीं याद आऊंगा तुम्हे...



Monday, October 28, 2013

जादू


तुम्हे कुछ लिखने के लिए पैन उठाया है
कागज भी पास ही पड़ा है मेरे
तुम्हारी जिंदगी जैसा सफेद
उसके नीचे कुछ रखना भी है
जो संभाल सके शब्दों को
शब्द जो तुम्हारी तरह ही सच्चे हैं
वो किताब दिखी
जिसे मैं तुम्हारे नाराज होने से पहले पढ़ रहा था
उसका नाम जादू है
ये वही किताब है जिसे मैं पढ़कर तुम्हे देना चाहता था
इस सीरिज की दोनों किताबें तुम पढ़ चुकी होगी शायद
किताबें जादू करती हैं, पर तुम से ज्यादा नहीं
किताबों में तो हर बार तुम्ही मिली हो मुझे
तुम वैसी ही इंसान हो
जैसा किताबों में लिखा है
कौन हो तुम, कहां से उतरी हो
कहां से सीखी तुमने इतनी इंसानियत
आओ, दुनिया को अपने जैसा बना दो...

Monday, October 21, 2013

तुम


तुम जानती हो तुम कौन हो
मेरी नजरों से खुद को देखो
तुम पीपल के पेड़ का वो पत्ता हो
जो सबसे ऊपर होते हुए भी झुका रहता है
नीचे देखता है, दुनिया की ओर
तुम अमलतास के फूल की वो सबसे छोटी पत्ती हो
जो एक पल में दुनिया को खुशबूदार बना सकती है
तुम सूरज के उगने के बाद की वो पहली किरण हो
जिसे देखकर आंखों को सुकून मिलता है
तुम हजारों सितारों में चमकता वो चांद हो
जिसे लाखों बार देखकर भी मन नहीं भरता
तुम समुद्र में बहता वो पानी हो
जिसे जितनी गहराई में जाकर देखो, उतना ही खुबसूरत लगता है
तुम वो मंजिल हो, जहां तलाश मुक्कमल हो जाती है मेरी
तुम्हारे होठों, हाथों, एहसास और दिल के आगे दूसरी कोई दुनिया नहीं...

सही और गलत


कुछ भी सही और गलत नहीं होता
इस दुनिया में
जो तुमने किया वो भी सही
जो मैंने किया वो भी
कौन तय करता है
कौन तय करेगा
सही और गलत
कोई नहीं
न तुम, न मैं और न वो
सब सही हैं अपनी-अपनी जगह
सबके पास तर्क होंगे अपनी बातों के
बस, जब हम सोचना छोड़ देते हैं
दूसरों के बारे में
तो हमारे फैसले सही और गलत के दायरे में आ जाते हैं...

Wednesday, September 18, 2013

प्रेम का अनुवाद

याद है तुम्हे
एक दिन मैंने कहा था
मैं किसी और का होना चाहता था
तुमसे मिलने से पहले
तुम कितना खुश हुई थी ये जानकर
कि उसने मुझे अपनाया नहीं था
अगर मुझे वो अपना लेती
तो तुम्हे वो प्रेम कभी न मिलता
जो मिला
आज फिर किसी को मेरी जरूरत है
तुमने उसकी मदद की है
मुझे छोड़कर
इसके लिए तुम्हे याद रखा जाएगा
हमेशा-हमेशा
मैं प्रेम का अनुवाद नहीं करूंगा
वो तो तुम करोगी
हजारों, लाखों, करोड़ों लोगों के लिए
मैं तो बस उसे प्रेम करूंगा
तब तक
जब तक वो मुझे छोड़ नहीं जाती
किसी और के लिए...