बादल गरजे
नींद खुल गई है मेरी
शायद बारिश होगी
मैं सपने में था
तुम्हारे साथ
या शायद तुम आई थी मुझसे मिलने
परेशान, उदास और मायूस
तुमने दूर से इशारा किया था सपने में
जल्दी आने को
या शायद कहा
वहीं रहो
क्यों आते हैं ऐसे सपने
क्या तुम ये कहने आई थी
कि मत याद आओ मुझे
या मेरी याद खींच लाई थी तुम्हे
बाहर बारिश तेज हो गई है
मन में तूफानों के बाद की आंधी बढ़ रही है
क्या था सपने का मतलब
मुझे पीछे छूटना होगा शायद
क्योंकि तुम्हे जिंदगी में बहुत आगे जाना है
मैं पच्चीस का होकर भी सोलह की तरह प्रेम करता हूं
उस दिन वाली बारिश याद है तुम्हे
मैं अकेला भीग रहा था
तुम खड़ी थी सबके साथ
खुद को बचाकर
बाद में तुमने कहा था
तुम भी भीगना चाहती थी
साथ-साथ
उस दिन सिर्फ तन भीगा था मेरा
मन तो तुम्हारे पीले दुपट्टे में उलझा था
आज जब तुम नाराज हो
सपने में भी कुछ नहीं बोली
बाहर बारिश और तेज हो गई है
जागने पर सबसे पहले मैंने फोन देखा
नहीं भेजा था तुमने कोई 'टैक्स्ट'
मैं जानता हूं
तुम्हे सपने नहीं आते
तुम तो दिन में जीती हो उनमें
मैं बहुत थकने के बाद सोता हूं
फिर भी बेचैन करने आ जाते हैं
बारिश और तेज हो गई है
बिजली की कुछ तारें टकरा रही हैं
एक सेकेंड की रोशनी में भी तुम्हारा चेहरा दिखता है
दिल बैठने लगा है
बारिश कम हो गई है
जाओ, चली जाओ
मैं नहीं याद आऊंगा तुम्हे...

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